मज़ा' तो तब है जब 'खुशबू' आपके 'किरदार' से आये

" 'इत्र' से.. 'कपड़ों' को ..'महकाना'.... 'बड़ी' 'बात' नहीं

'मज़ा' तो तब है जब 'खुशबू' आपके 'किरदार' से आये "

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